हिन्दी विभाग
  • हिन्दी विषय के साथ अथवा किसी भी अन्य विषय के साथ बी.ए. अथवा बी.सी.ए./बी.काॅम./बी.एस.सी. करने के उपरान्त छात्राएँ हिन्दी साहित्य लेकर स्नातकोत्तर {एम.ए.} का अध्ययन कर सकती हैं । स्नातकोत्तर हिन्दी मे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रारंभ नए पाठ्यक्रम के साथ महाविद्यालय में पत्रकारिता, कंप्यूटर, अनुवाद मीडियालेखन आदि पढाने की विशेष सुविधा उपलब्ध हैं ।
  • वर्तमान समय की माँग के अनुरूप आधुनिकतम, रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों से सुसज्जित हिन्दी साहित्य में एम.ए. करने के उपरान्त कार्यक्षेत्र के अनेक द्वार खुल जाते हैं । जैसे- पत्रकारिता,मीडिया/मासमीडिया,बैंक एवं सार्वजनिक उपक्रमों में हिन्दी अधिकारी,स्कूल-कॉलेजों में अध्यापन, सरकारी-गैर सरकारी संस्थाओं में अनुवादक, विज्ञान-वाणिज्य आदि विड्ढयों पर स्वतन्त्र लेखन तथा प्रकाशन-उद्योग आदि ।
  • हिन्दी विड्ढय के साथ विविध प्रशासनिक सेवा की तैयारी एवं उसके आधार पर परीक्षा पास करना अधिक सुविधा जनक एवं अधिक उपयुक्त होता है । हिन्दी विड्ढय के साथ विशेड्ढ योग्यता के छात्र ही परीक्षा देते हैं। हिन्दी विषय को लेकर परीक्षा देने वालों के अनुक्र्र्रम {रैंकिंग} पहुँच में होती हैं।
  • सत्यसाई महिला महाविद्यालय के हिन्दी विभाग स्नातक वं स्नातकोत्तर कक्षाओं में समस्त अधुनातन पाठ्य विधियों का उपयोग करते हुये अनेक नवाचार { इनोवेशन} एवं विविध परियोजनाओं {प्रोजेक्टस} आदि के माध्यम से अत्यंत सार्थक शिक्षा देता है । इससे हिन्दी विषय लेकर अध्ययन करने वाली छात्राओं के अंक भी अच्छे आते हैं जो उन्हें भविष्य में अपना रोजगार चुनने में सहायक होते है ।
  • स्नातकोत्तर हिन्दी के उपरान्त महाविद्यालय की 70 प्रतिशत छात्राओं ने विविध प्रांतो में सम्माननीय पदों में नौकरी करके अपना भविप्य प्रारंभ किया है ।
  • महाविद्यालय के केन्द्रीय पुस्तकालय की लगभग 2855 हिन्दी की पुस्तकों के अतिरिक्त विभागीय स्तर पर लगभग 450 पुस्तकें एवं अनेक साहित्यिक पत्रिकाएँ छात्राओं के नियमित उपयोग के लिए उपलब्ध रहती हैं ।
  • हिन्दी विभाग में दृश्य-श्रव्य माध्यम से पठन-पाठन की पूरी व्यवस्था है।
  • विभाग की शिक्षिकाएँ उच्च-शिक्षित हैं तथा हिन्दी-साहित्य के क्षेत्र में गंभीर लेखन एवं शोध परियोजनाओं में कार्यरत हैं।हिन्दी विभाग प्रमुख का दायित्व संभाल रहीं सहा.प्राध्यापक डॉ.बिनय राजाराम की 18 साहित्यिक कृतियाँ , तथा शताधिक साहित्यिक/शोध निबन्ध अन्तर्राष्टीय/राष्ट्रीय एवं प्रांतीय स्तर की पत्र-पत्रिकाओं एवं शोध-संग्रहों में प्रकाशित है।
  • हिन्दी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. बिनय राजाराम बरकतुल्ला विश्वविद्यालय द्वारा पंजीकृत शोध निदेशक हैं,जिनके अधीन 9 शोध छात्राओं को पीएच.डी उपाधि प्राप्त हो चुकी है एवं 01 शोधग्रंथ उपाधि हेतु बरकतउल्ला विष्वविद्यालय में प्रस्तुत है। वर्तमान में 6 शोध-छात्रा अत्यन्त सार्थक विपयों पर शोध-कार्य-रत हैं। हिन्दी विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर के शोध-सेमिनार एवं विविध साहित्यिक विपयों पर चर्चाएँ आयोजित की जाती है।
  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सौजन्य से सन् 2000 में आयोजित हिन्दी साहित्य में जीवन मूल्यों की अवधारणा विपय केन्द्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोप्ठी उल्लेखनीय है ।
  • हिन्दी विपय पर केन्द्रित पोस्टर प्रतियोगिताएँ एवं तत्संबन्धी प्रदर्शनियों का आयोजन विभाग द्वारा नियमित रूप स्ेा किया जाता है । हिन्दी विभागाध्यक्ष के प्रमुख संपादकत्व में महाविद्यालय की पत्रिका 'दिव्या'का नियमित प्रकाशन होता है जो महाविद्यालयीन पत्रिकाओं में अपनी गुणवत्ता के कारण सदैव चर्चा मे रहती है ।
  • आज के प्रतियोगिता से भरपूर होडा-होडी के माहौल में जहाँ विशेष शिक्षा का महत्व बढ जाता है, वहाॅं 'हिन्दी साहित्य को कैरियर ' बनाना अपने आप में एक विशिप्ट उपलब्धि हो सकती है ।
  • वर्प 2004 की मुख्य परीक्षा - एम.ए.हिन्दी साहित्य विपय में महाविद्यालय की छात्रा कु. राजेश्वरी महोबिया ने 72.2 प्रतिशत अंक अर्जित करके बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में एम.ए.हिन्दी में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
  • हिन्दी विभाग की छात्राओं ने 'शैक्षिक-विस्तार ' के तहत भोपाल के निकट स्थित ''मनुआभान की टेकरी '' तथा ''उदयगिरी'' की गुफाओं का शैक्षिक भ्रमण किया।
  • ''हिन्दी की पारिभापिक शब्दावली '' विपय को केन्द्र में रखकर इस वर्ष समस्त छात्राओं की भागीदारी के लिए विभाग द्वारा ''परियोजना कार्य'' की प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ।
  • हिन्दी विभाग की प्राध्यापिकाएँ संगोप्ठियों एवं साहित्यिक कार्यक्रमों में नियमित भाग लेती हैं तथा छात्राओं को भी ऐसे कार्यक्रमों में सहभागिता के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
नाम योग्यता विशिष्टीकरण
डॉ. सुश्री अनुपमा चैहान पीएच.डी रमेशचन्द्रशाह का गद्य-विमर्प {उपन्यास गोबर गणेश के विशेष संदर्भ में}
डॉ. मनीषा त्रिपाठी पीएच.डी "मेहरुन्निसा परवेज़ के उपन्यास साहित्य में मानव मूल्य "
डॉ. अनुराधा सिंह पीएच.डी "डॉ. कृष्ण चराटे और उनका व्यंग लेखन-एक समीक्षात्मक अध्ययन "
डॉ अनीता तिवारी
पीएच.डी  "हिंदी की रामकाव्य परंपरा में शबरी एक अनुशीलन "

हिन्दी विभाग की उपलब्धियाँ (2014-15) :

  • 4 अगस्त 2015 को हिन्दी विभाग द्वारा राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त जयंती को कवि दिवस के रूप में मनाया गया जिसमें महाविद्यालय की छात्राओं ने गुप्तजी की कविता का पाठ, कवि परिचय, स्वरचित कविताओं का पाठ किया।
  • 8 सितम्बर 2014 से 13 सितम्बर 2014 तक ’’भावाभिव्यक्ति संस्कार’’ नामक छः दिवसीय कार्यशाला का आयोजित किया गया जिसमं आकाशवाणी भोपाल की सेवानिवृत्त वरिष्ठ उद्घोषिका श्रीमती जया आर्य विषय विशेषज्ञ  के रूप में उपस्थित थीं। इस कार्यशाला में छात्राओं को रूपक, एकांकी, कविता पाठ एवं संचालन संबंधी प्रशिक्षण  दिया गया।
  • 23 सितम्बर 2015 को प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी हिन्दी वैभव प्रदर्षनी के अंतर्गत ''साहित्य में प्रकृति चित्रण'' विषयक पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । इस पोस्टर प्रदर्षनी का उद्घाटन तथा छात्राओं द्वारा संपादित फलक पत्रिका का विमोचन गुप्तचर विभाग, भारत सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी श्री संतोष रंजन षुक्ल , बैंक ऑफ बड़ौदा के महाप्रबंधक श्री नागेष श्रीवास्तव तथा बैंक ऑफ बड़ौदा के हिन्दी अधिकारी श्री सोमेन्द्र यादव ने किया ।
  • 13 सितम्बर 2014 को हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में हिन्दी विभाग द्वारा ’’हिन्दी वैभव प्रदर्षनी’’ के अन्तर्गत पोस्टर प्रदर्षनी का आयोजन किया गया जिसका विषय था ’’कविता, कहानी, नाटक आदि की चित्रमय प्रस्तुति’’। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे बैंक आॅफ बडौदा के महाप्रबंधक श्री नागेश श्रीवास्तव, विशेष अतिथि थीं श्रीमती जया आर्य एवं विशेष आमंत्रित अतिथि थे बैंक आॅफ बडौदा के हिन्दी अधिकारी श्री सुभाष अरोड़ा।
  • 29 अक्टूबर 2015 को सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती एकता दिवस के अवसर पर हिन्दी विभाग ने बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा प्रायोजित मेरे सपनों का भारत व भ्रष्टाचार मुक्त भारत विषयक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जिसमें 107 छात्राओं ने भागीदारी की व पुरस्कार अर्जित किये ।
  • 13 फरवरी 2016 को हिन्दी विभाग द्वारा निराला जयंती, बसंत पंचमी के अवसर पर मॉ सरस्वती का पूजन किया गया एवं साहित्यिक अंत्याक्षरी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अथिति थे ख्यातिलब्ध साहित्यकार निराला सृजनपीठ के निदेषक डॉ. देवेन्द्र दीपक ।
  • हिन्दी विभाग की सहायक प्राध्यापिकाओं द्वारा बी.एड. की छात्राओं को हिन्दी विषय के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर व्याख्यान दिये गये ।
  • हिन्दी से सामान्य विद्यार्थियों की पहचान कराने हेतु प्रतिवर्प हिन्दी विभाग द्वारा 'हिन्दी मास' के आयोजन के तहत भोपाल के लब्ध प्रतिप्ठित साहित्यकारों को आमंत्रित कर छात्राओं से उनका सीधा साक्षात्कार करवाया जाता है ।
  • 14 सितम्बर 2015 को हिन्दी विभाग द्वारा हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बैंक ऑफ बड़ौदा के महाप्रबंधक श्री नागेष श्रीवास्तव ने 'बैंकों में हिन्दी का बढ़ता वर्चस्व' विषय पर व्याख्यान दिया ।
  • 23 सितम्बर 2015 हिन्दी वैभव प्रदर्षनी के अंतर्गत गुप्तचर विभाग, भारत सरकार के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी श्री संतोष रंजन षुक्ल ने 'सकारात्मक सोच के विकास में समर्थ साहित्य' विषय पर व्याख्यान दिया । वैभव प्रदर्षनी में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की ।
  • 13 सितम्बर 2015 को हिन्दी विभाग द्वारा निराला जयंती,बसंत पंचमी के अवसर पर मॉ सरस्वती का पूजन किया गया । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ख्यातिलब्ध साहित्यकार,निराला सृजन पीठ के निदेषक डॉ.देवेन्द्र दीपक ने 'समाज में महिला साहित्यकारों का योगदान' विषय पर व्याख्यान दिया । जिसमें महाविद्यालय की समस्त प्राध्यापिकाएॅ एवं छात्राएॅ उपस्थित थीं ।