Spiritual Camp 2017-18

भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्मिक चार दिवसीय आवासीय शिविर
संयोजक - डाॅ. नीना अरोरा
सह.संयोजक - डाॅ. सुनीता यादव एवं डाॅ. अंजु वाजपेयी

वर्तमान युग की छात्राओं के व्यक्तित्व विकास के लिए भारतीय संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धनए अति आवष्यक है। इसी उद्देश्य से प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी चार दिवसीय भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्म पर आधारित निःषुल्क आवासीय शिविर का आयोजन महाविद्यालय परिसर में दिनांक 12/10/2017 से 15/10/2017 तक किया गया। इस शिविर में 163 छात्राओं एवं लगभग 100 प्रध्यापकों एवं कर्मचारियों ने भागीदारी की।

भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्म शिविर कार्यक्रम विवरण

उद्घाटन समारोह

चार दिवसीय 'भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्मिक शिविर का उद्घाटन दिनांक 12 अक्टूबर 2017 को प्रातः माननीय श्री आलोक शर्मा महापौर भोपाल के कर कमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं छात्राओं के वेदोच्चारण से हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. सुधा पाठक के स्वागत भाषण द्वारा उद्घाटन सत्र का प्रारम्भ हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर श्री आलोक शर्मा जी ने शिविरार्थियों को आषीर्वचन देते हुए कहा कि महाविद्यालय में भारतीय संस्कृति और अध्यात्म पर शिविर हो, वर्तमान समय में यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। यह भारत की गौरवशाली संस्कृति को आगे बढ़ाने का अत्यंत सराहनीय कार्य है। इस शिविर में विभिन्न विषयों के मंथन से जो अमृत निकलेगा वह आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभकारी होगा। महापौर ने छात्राओं से प्रदेश को स्वच्छता में प्रथम स्थान पर लाने का प्रयास करने हेतु आह्नवान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं महाविद्यालय शासी परिषद् अध्यक्ष डाॅ. मीना पिंपलापुरे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में शिविरार्थियों को सत्य साई बाबा की शिक्षाओंं का अनुसरण कर जीवन को सहज रूप से अध्यात्म से जोडें रखने को कहा।

शिविर संयोजक डाॅ. नीना अरोरा ने चार दिवसीय शिविर की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा शिविर के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डाला । शिविर सह-संयोजक डाॅ. सुनीता यादव ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उद्घाटन -सत्र का संचालन डाॅ. अनुपमा चैहान ने किया।


समापन समारोह

चार दिवसीय 'भारतीय संस्कृति एवं अध्यात्म शिविर का समापन समारोह दिनांक 14 अक्टूबर 2017 को श्रीमती माया सिंह नगरीय विकास एवं आवास मंत्री, म.प्र. शासन, भोपाल के मुख्य आतिथ्य एवं लोक सभा सांसद श्री आलोक संजर के विशेष आतिथ्य में सम्पन्न हुआ।

मुख्य उद्बोधन देते हुए श्रीमती माया सिंह ने विवेकानन्द की पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए -
वर्तमान गढ़ो रे, अतीत पढ़ों रे, यत्नों की चैखट पर, भाग्य गढ़ों रे, जागो, उठो, आगे बढ़ो रे।
न कठपुतली बनकर जियो और न ही उड़नपरी बनकर अपनी धरती से नाता तोड़ो। अपनी परम्पराओं और संस्कृति का निर्वहन करते हुए नवीन तकनीक से जुड़ें। महानता और हौसला हो तो हम कठिन से कठिन परिस्थिति पर भी विजय प्राप्त कर सकते हैं। समाज सुधार के लिए कोई देवदूत नहीं आयेगा हमें अपने कर्तव्य से ही इन कुरीतियों और व्यवस्थाओं को बदलना होगा।

विशेष उद्बोधन द्वारा श्री आलोक संजर ने कहा जिस प्रकार नाड़ी रक्त की संवाहिका होती है, वैसे ही नारी संस्कारों की संवाहिका है। धैर्य नारी का सबसे बड़ा गुण है, जो समाज को सकारात्मक सोच की ओर ले जाने की क्षमता रखता है। छात्राओं को स्वच्छता का संकल्प करने की आवष्यकता है। आज हमें अ से अनार नहीं वरन् अ से अधिकार, क से कर्तव्य और ज से जिम्मेदारी पढ़ने की आवष्यकता है।

शिविर संयोजक डाॅ. नीना अरोरा ने चार दिवयीय शिविर की रपट प्रस्तुत की छात्राओं को अनुभवात्मक प्रषिक्षण के अंतर्गत रचनात्मक कार्य करवाए गए। शिविरार्थियों द्वारा जीवन-मूल्यों पर आधारित प्रसंगों पर लघु नाटिकाएँ डाॅ. श्रीमती अनीता अवस्थी एवं डाॅ. अनीता तिवारी के मार्गदर्षन में प्रस्तुत की गईं। देश भक्ति गीतों एवं भजनों पर आधारित संगीत संध्या का आयोजन भी हुआ तथा शिविर सह-संयोजक डाॅ. सुनीता यादव ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

श्री सत्य साई बाबा की महामंगल आरती द्वारा शिविर का समापन हुआ।