अध्याय-3 (मैनुअल-2)
अधिकारियों और कर्मचारियों की शक्तियाँ एवं कर्तव्य

Chapter - 3 (Manual - 2)
Powers and Duties of Officers and Employees

3.1 महाविद्यालयीन अधिकारियों, कर्मचारियों, शिक्षकों की शक्तियां एवं कर्तव्य :

 

क्र. पद का नाम प्रशासकीय शक्तियाँ वित्तीय शक्तियाँ अन्य शक्तियाँ कर्तव्य
1 प्राचार्य संबंधित के कार्यो / शक्तियों एवं अधिकारों का सक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है ।
2 सहायक प्राध्यापक
3 ग्रंथपाल
4 क्रीड़ा अधिकारी
5 छात्रावास प्रबंधक
6 मुख्य लिपिक
7 लेखापाल
8 प्रयोगशाला तकनीशियन
9 बुक लिफ्टर
10 भृत्य/चैकीदार/माली आदि

 

प्राचार्य

अ. प्राचार्य के अधिकार एवं कार्य -

संस्था प्रमुख की हैसियत से प्राचार्य के कार्यों/कर्तव्यों को किसी एक सूची में सीमित नहीं किया जा सकता है। प्राचार्य को महाविद्यालय प्रमुख (प्रथम श्रेणी अधिकारी) की हैसियत से वे सभी प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार स्वयं प्राप्त होते हैं जिनका उल्लेख, 'मूलभूत नियम', वित्तीय संहिता तथा कोष संहिता में हुआ है।

प्राचार्य के प्रमुख अधिकार एवं कार्य निम्नानुसार अंकित है:-

ब. प्रशासनिक /वित्तीय शक्तियाँ :

ब.1 प्रशासनिक शक्तियाँ :

ब. 2 वित्तीय शक्तियाँ:-

स. अन्य सहायक वित्तीय अधिकार -

विभागाध्यक्ष -

महाविद्यालय के प्रत्येक शैक्षणिक विभाग में वरिष्ठतम षिक्षक विभागाध्यक्ष के रूप में मनोनीत है । विभागाध्यक्ष निम्न कार्य करते हैं -

ग्रन्थपाल -

ग्रन्थपाल पुस्तकालय प्रमुख होता है और उस नाते उनका कार्य विभागाध्यक्ष के समकक्ष है, इसका विवरण इस प्रकार है:

क्रीड़ा अधिकारी

क्रीड़ा अधिकारी क्रीड़ा विभाग का प्रमुख होता है उस नाते उनके कार्य और अधिकार विभागाध्यक्ष के समकक्ष हैं। इसका विवरण इस प्रकार है -

सहायक प्राध्यापक (शिक्षक संवर्ग) -

किसी भी शिक्षण संस्था में शिक्षक मुख्य धुरी के रूप में रहते हैं। शिक्षकों की योग्यता, निष्ठा, लगन और परिश्रम से संस्था विकसित होती है। संस्था की प्रतिष्ठा भी शिक्षकों की प्रतिष्ठा से स्थापित होती है अतः किसी भी व्यवसाय की तुलना में शिक्षकीय व्यवसाय अधिक उदात्त और सम्माननीय है।

शिक्षकों से महाविद्यालय निम्न अपेक्षाएँ रखता है -

मुख्य लिपिक -

मुख्य लिपिक स्थापना शाखा का प्रमुख कर्मचारी होता है इस नाते स्थापना से संबंधित समस्त कार्य का उत्तदायित्व मुख्य लिपिक का है ।

लेखापाल

लेखापाल लेखा शाखा का क्रियात्मक प्रभारी होता है। इनके प्रमुख कार्य इस प्रकार है :

उच्च श्रेणी तथा निम्न श्रेणी लिपिक -

कार्यालय के लिपिकीय कार्यों के सम्पादन के लिए तथा लेखापाल एवं मुख्य लिपिक द्वारा समय-समय पर सौंपे कार्यों के सम्पादन हेतु, एक उच्च श्रेणी तथा तीन निम्न श्रेणी लिपिकों के पद निर्मित हैं।

विद्यार्थी, छात्रवृति, भंडारण, टाइपिंग कार्य, आवक-जावक, शुल्क संकलन सदृष कार्यों का भार इन लिपिकों को सौंपा गया हैं।

प्राचार्य मुख्य लिपिक से विचार-विमर्श कर, इन लिपिकों को कार्यालय और महाविद्यालय के अन्य कार्य सौंपते है।

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी -

भृत्य

महाविद्यालय एवं कार्यालय में विभिन्न कार्यों के निर्बाध सम्पादन के लिए प्राचार्या द्वारा मुख्य लिपिक से विचार-विमर्श कर भृत्यों के बीच कार्यों का विभाजन किया जाता है। प्राचार्या का उन पर सतत् नियंत्रण एवं निरीक्षण रहता है।

भृत्यों के कार्यों पर प्राचार्य, मुख्य लिपिक की सीधी नजर रहती है ताकि वे अपने कार्यों में किसी प्रकार शिथिलता न बरतें।

सफाई कर्मचारी (स्वीपर) -

यह पद भी महाविद्यालय की स्थापना में स्वीकृत है। सफाई कर्मचारी विद्यालय के शौच कक्षों की स्वच्छता के साथ, भवन तथा परिसर की सफाई के लिए जिम्मेदार होता है।

प्रयोगशाला तकनीशियन: (अराजपत्रित तृतीय श्रेणी शैक्षणिक संवर्ग) -

जिन विषयों में प्रायोगिक कार्य होता है, वहां प्रयोगशाला में प्रायोगिक कार्यों के सम्पादन के लिए प्रयोगशाला तकनीशियन (तृतीय श्रेणी) के पद निर्मित होते हैं।प्रयोगशाला तकनीशियन, प्रयोगशाला का प्रभारी होता है और विभागाध्यक्ष के निर्देशन में कार्य करता है। इनके मुख्य कार्य इस प्रकार हैं-